Biography of Ramkrishna mukherjee in hindi: रामकृष्ण मुखर्जी का जीवन परिचय, कृतियां और योगदान

SUSHIL SHARMA
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रामकृष्ण मुखर्जी का जीवन परिचय : नमस्कार दोस्तों, हिंदी विज़न में आपका स्वागत है। आज हम राम कृष्ण मुखर्जी के बारे में जानेंगे। उनके जीवन के हर महत्वपूर्ण पहलुओं पर ध्यान देते हुए हम उनकी उपलब्धियों और योगदान के बारे में विस्तृत वर्णन करेंगे। भारत मे अगर समाजशास्त्रियों की बात होगी तो उनमें राम कृष्ण मुखर्जी का नाम भी आदर के साथ लिया जाता है। समाज विज्ञानियों में मुखर्जी जी का प्रमुख स्थान है। उन्होंने समाज के विभिन्न विषयों पर चिंतन कर उससे हमें अवगत कराया है। 

तो चलिए बिना किसी देरी के राम कृष्ण मुखर्जी जी की जीवनी के बारे में जानते हैं - 

रामकृष्ण मुखर्जी का जीवन परिचय | Biography of Ramkrishna mukherjee in hindi

Biography of Ramkrishna Mukherjee 


 प्रमुख जानकारी 

पूरा नाम     -  रामकृष्ण मुखर्जी
पिता          -  श्री सतींद्र नाथ मुखर्जी
जन्म          -  14 नवंबर 1919
जन्म स्थान  -  बड़नगर, कोलकाता
मृत्यु           -  15 नवंबर 2015 
पत्नी          -  प्रभाती मुखर्जी
शिक्षा         -   एम. एस. सी. , पी.एच.डी 

रामकृष्ण मुखर्जी जी का जन्म 1919 में कोलकाता  (कलकत्ता) के बडनगर में हुआ था। इनके पिता श्री सतींद्र नाथ मुखर्जी भारतीय रेलवे में एक इंजीनियर के पद पर तैनात थे। सम्पन्न परिवार में जन्मे रामकृष्ण मुखर्जी जी ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा कोलकाता में ही प्राप्त की। उन्होंने कोलकाता (कलकत्ता) विश्वविद्यालय से एम. एस. सी (M. Sc) की डिग्री प्रथम श्रेणी में हासिल की। 

पी० एच० डी० की उपाधि के लिए वह इंग्लैंड के कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय  गए जहां उन्होंने अपने शोधकार्य शुरू किए। उन्हें सन 1948 में यह उपाधि प्राप्त हुई। तत्पश्चात वह लंदन के सामाजिक सर्वेक्षण विभाग में मुख्य शोध अधिकारी के तौर पर एक वर्ष तक कार्य किया। 1949 के अंत मे वह अंकारा चले गए जहाँ उन्होंने तुर्की सरकार के मुख्य सलाहकार के रूप में काम किया। सन 1952 में वह वापस लंदन आ गए और 'लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स' में एक वर्ष तक सलाहकार के रूप में कार्य किया। 

रामकृष्ण मुखर्जी जी ने सन 1953 से 1957 तक बर्लिन के हम्बोल्ड विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के तौर पर कार्य किया। इसके बाद 1957 से 1979 तक उन्होंने भारतीय सांख्यकीय संस्थान (Indian Statistical Institute) कोलकाता (कलकत्ता)  में रिसर्च प्रोफेसर के रूप में कार्य किया। इस दौरान वह 1974 में भारतीय 'समाज विज्ञान शोध परिषद' के सदस्य भी रहे। 

रामकृष्ण मुखर्जी ने भारत के अलावा कई और देशों में भी शोध कार्य किया है। उन्होंने भारत कर अलावा इंग्लैंड, फ्रांस, तुर्की, युगांडा, चेकोस्लोवाकिया, बांग्लादेश, और जर्मनी में भी रिसर्च किया है। 

उन्होंने अपने जीवन मे कई महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखने के साथ ही 100 से भी अधिक शोध पत्र लिखे जो कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं। 

2013  तक रामकृष्ण मुखर्जी जी ने अपने घर और ही समाज वैज्ञानिकों के साथ चर्चा करते रहे। अत्यधिक वृद्ध हो जाने के कारण इसके बाद इन्होंने कोई भी पुस्तक या लेख नही लिखा।   अतुलित प्रतिभा के धनी रामकृष्ण मुखर्जी जी का देहांत 15 नवंबर 2015 को हो गया। 

रामकृष्ण मुखर्जी जी का योगदान

समाजशास्त्र में रामकृष्ण मुखर्जी जी का योगदान किसी परिचय का मोहताज नही है। उन्होंने समाज के कई पहलुओं से हमें अवगत कराया है। उन्होंने ग्रामीण समाज पर महत्वपूर्ण शोध किया जो कि सराहनीय है। उन्होंने परिवार संरचना और नियोजन पर प्रभावशाली शोध किया है। ईस्ट इंडिया कंपनी के उद्गम और पतन के महत्वपूर्ण विषयों पर प्रकाश डाला। कृषक वर्ग संरचना पर गहन शोध प्रस्तुत किया। 

उन्होंने ऐतिहासिक समाजशास्त्र पर विशेष बल दिया है। उन्होंने परिवार और ग्रामीण समाज जा वर्गीकरण करने के अतिरिक्त संस्कृति ग्रहण की समस्याओं पर प्रभावशाली विवेचना की।





रामकृष्ण मुखर्जी द्वारा लिखी पुस्तकें

 रामकृष्ण मुखर्जी जी ने कई महत्वपूर्ण विषयों पर प्रकाश डालते हुए चिंतन कर कई पुस्तकें लिखीं। जिनमे से प्रमुखतः हैं - 

●  पश्चिम बंगाल में कृषक वर्ग संरचना (Peasant Class Structure in West Bengal) -1949

●  युगांडा की समस्या (Problem of Uganda) - 1957

●  एक ग्रामीण समाज की गत्यात्मकता ( The dynamics of a rural society) - 1957

●  ईस्ट इंंडिया कंपनी का विकास एवं पतन (The rise and fall of the East India Company) - 1958

●. वर्तमान भारत मे समाजशास्त्री तथा सामाजिक परिवर्तन (The sociologist and social change in india today) - 1965

●  बंगाल के छः गांव ( Six villages of Bengal) - 1971

●  सामाजिक संसूचक (Social Indicators) - 1975

●  भारत में परिवार तथा नियोजन (Family and planning in India) - 1976

●  पश्चिम बंगाल में परिवार संरचना (West Bengal family structure) - 1977

●  आगमनात्मक समाजशास्त्र में अन्वेषण (Exploration in inductive Sociology) - 1978

●  भारतीय समाजशास्त्र का समाजशास्त्र (Sociology of Indian sociology) - 1979


इन पुस्तकों के अलावा रामकृष्ण मुखर्जी जी ने 100 से भी अधिक शोध पत्र लिखे जो कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं।

रामकृष्ण मुखर्जी को मिलने वाले अवार्ड्स 

अतुलित चिंतन से परिपूर्ण प्रतिभा के धनी रामकृष्ण मुखर्जी जी को निम्नलिखित अवार्ड्स से सम्मानित किया गया - 

●  स्वामी प्रणवानंद पुरस्कार
●  एशियाई समाज स्वर्ण पदक
●  सामाजिक विज्ञान के लिए जवाहरलाल नेहरू पुरस्कार
●  भारतीय सामाजिक समाज का लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार






आशा करते हैं आपको आज का हमारा यह लेख " Ramkrishna mukherjee ka jivan parichay" पसंद आया होगा। हमने यह प्रयास किया है कि आपको सारी जानकारी विस्तार से दे सकें। फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल है तो कमेंट बॉक्स में जरूर पूछें। 

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